अपने जीने की शर्तें

  

अपने जीने की शर्तें


अगर तुम
 देखते हो उतना
 दिखाया जाए जितना
 तो नहीं देख पाओगे वह सब
 जो तुम्हें देखना चाहिए
 और अंधे हो जाओगे

अगर तुम
 पढ़ते हो उतना
 पढ़ाया जाए जितना
 तो नहीं जान पाओगे वह सब
 जो तुम्हें जानना चाहिए
और मूर्ख बन जाओगे

अगर तुम
 चलते हो उधर
चलाया जाए जिधर
 तो नहीं पहुंच पाओगे वहां
 जहां तुम्हें पहुंचना चाहिए
 और पंगु हो जाओगे

अगर तुम
 सोचते हो उतना
 कहा जाए जितना
 तो नहीं सोच पाओगे वह 
जो तुम्हें सोचना चाहिए
और विक्षिप्त हो जाओगे 


अगर तुम
बोलते हो उतना
जितनी हो इजाजत
 तो यकीन मानिए
 एक दिन गूंगे हो जाओगे

अगर तुम
 नहीं चाहते बनना
अंधा 
मूर्ख
पंगु
विक्षिप्त
गूंगा

तो फिर से तय करो
अपने जीने की शर्तें I


दुलीचंद कालीरमन


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