बसंत पंचमी :सरस्वतेभ्यो नमो नमः।



श्रीमान बालकिशन जी (विद्या भारती हरियाणा)


माघ मास शुक्ल पक्ष पंचम को बसंत पंचमी का त्योहार उत्तरी भारत में विशेष रूप से मनाया जाता है इस दिन घरों में पीले चावल या हलवा का मिष्ठान बनाया जाता है पीले रंग के वस्त्र पहनने की परम्परा है वायु की शुद्धि के लिए धार्मिक स्थानों एवं परिवारों में यज्ञ का आयोजन किया जाता है आज का दिन शुभ मुहूर्त का दिन है अतः मकान, दुकान प्रतिष्ठानों में नया प्रवेश करने के लिये आयोजन किये जाते हैं

खेतों में सरसों की फसल लहलहाती हुई देखने को मिलती है जिस पर पीले रंग के फूल बड़े मनमोहक लगते हैं तथा बसन्त पंचमी के बाद फसल पकने की ओर अग्रसर हो जाती है जो समाज में खुशहाली का सन्देश देती है

बसंत पंचमी का दिन विद्या की देवी मां सरस्वती का जन्म दिन भी है तमसो मा ज्योतिर्गमय की कामना करने वाले इस दिन सरस्वती मां का पूजन करते हैं। मां सरस्वती की कृपा आशीर्वाद से ज्ञान, बुद्धि, विद्या, स्वर, संगीत इत्यादि प्रतिभाओं का विकास होता है ऐसी कृपा आशीर्वाद से कोई भी वंचित रहे, इसके लिये समाज की भलाई के काम करने के लिये समर्पित सेवा भावी लोगों के द्वारा अपने-अपने प्रयत्नों से समाज के सहयोग से शिक्षण संस्थान चलाये जाते हैं जिनका उद्देश्य भी शिक्षा का प्रचार-प्रसार होता है इस कार्य में अनेक समाजिक संस्थाएं भी काम करती हैं जैसे एकल फाउंडेशन प्रतिष्ठान, वनवासी परिवार, हम फाउंडेशन , वनवासी कल्याण आश्रम, राष्ट्रीय सेवा भारती, हिन्दू सेवा प्रतिष्ठान इत्यादि

विद्याभारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान से सम्बद्ध देशभर में चलने वाले लगभग 25000 शिक्षण संस्थान भी इसी उद्देश्य से चलाये जा रहे हैं अभी तक जिन कठिन दुर्गम स्थानों पर शिक्षा की अलख नहीं जगाई गयी है, उन सीमावर्ती क्षेत्र, वनांचल, गिरीकंदराओं झुग्गी झोंपड़ियों में रहने वाले बंधु-बांधवों के लिये विद्यालय, एकल विद्यालय संस्कार केंद्र चलाकर  समाज के इन वंचित बंधुओं को भी शिक्षा का अधिकार प्रदान करवाया जा रहा है इसी काम की पूर्ति के लिये मां सरस्वती के उपासक आज के दिन बसंत पंचमी के अवसर पर सरस्वती पूजन के द्वारा समर्पण निधि एकत्र करते हैं

विद्यार्थी, आचार्य, अभिभावक, प्रबंध समिति, पूर्व छात्र समाज के शिक्षा प्रेमी बंधुओं से इस अवसर आग्रहपूर्वक निवेदन किया जाता है कि वे सभी अपने परिवार इष्ट-मित्रों सहित इस पुनीत कार्य के लिए सभी समर्पण करके अपने दायित्व का निर्वहन करें

यह परम्परा विद्याभारती के अंतर्गत अनेक वर्षों से अपनाई गई है जिसे हम सभी प्रतिवर्ष सहर्ष करते रहे हैं तथा जो परिणामकारी भी सिद्ध हो रही है अतः इस अवसर पर सभी शिक्षा प्रेमियों को बधाई शुभ कामनाएं मां शारदे सब का कल्याण करे



हे शारदे मां, हे शारदे मां,
अज्ञानता से हमें तार दे मां
हे शारदे मां।

तू स्वर की देवी, है संगीत तुझ से,
हर शब्द तेरा, है हर गीत तुझ से,
हम हैं अकेले, हम हैं अधूरे,
तेरी शरण हम, हमें तार देना
हे शारदे मां।

तू श्वेत वर्णी कमल पे विराजे,
हाथों में वीणा, मुकुट सर पे साजे,
मन से हमारे, मिटा दो अंधेरे,
हमको उजालों का संसार देना
हे शारदे मां।

ऋषियों ने समझी, गुणियों ने जानी,
वेदों की भाषा, पुराणों की वाणी
हम भी तो समझें, हम भी तो जानें
विद्या का हमको अधिकार देना
तेरी शरण हम हमें तार देना

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