5G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से नई संभावनाएं और चुनौतियां


5G और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से नई संभावनाएं और चुनौतियां

भारत सरकार के दूरसंचार मंत्रालय ने हाल ही में भारत में पांचवी पीढ़ी (5G) की दूरसंचार तकनीक के परीक्षण की देशी और विदेशी कंपनियों को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी. ऐसा अनुमान लगाया जा रहा है कि वर्ष 2021 तक भारत में 5G यानी पांचवी पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक विभिन्न कंपनियों द्वारा उपलब्ध करा दी जाएगी

 एक सामान्य नागरिक या उपभोक्ता के लिए यह खबर संतोषजनक हो सकती है. क्योंकि उसे 4G से कहीं बेहतर डाटा स्पीड मिलेगी. सरकार के इस कदम का कई राष्ट्रवादी संगठन विरोध कर रहे हैं. क्योंकि जिन कंपनियों को 5G परीक्षण करने की मंजूरी दी गई है, उनमें चीनी कंपनी हुवावे भी है. गौरतलब है कि यह वही हुवावे कंपनी है. जिसके कर्मचारियों पर फ्रांस के एक अखबार के अनुसार विभिन्न अफ्रीकी देशों में सेवाएं प्रदान करते हुए वहां के देशों का डाटा चीन की खुफिया एजेंसी के साथ सांझा करने का आरोप लगा है. 

यह आरोप लगाने के पीछे भी तर्क है. हुवावे कंपनी के कर्ता-धर्ता रेन झेंगफई चीनी सेना के पूर्व अधिकारी हैं. चीन के साथ भारत के रिश्ते चीन के पक्ष में झुके नजर आते हैं. चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा लगातार बढ़ता चला जा रहा है. 5जी संबंधी हार्डवेयर सिस्को सिस्टम्स, एरिकसन, नोकिया,सैमसंग कंपनियां भी बनाती हैं. लेकिन चीनी कंपनी हुवावे के उपकरणों की कीमत बहुत प्रतिस्पर्धी है. हुवावे पर आरोप है कि वह अपने हार्डवेयर के माध्यम से सूचनाएं बीजिंग में भेजने का कार्य करती है. हालांकि हुवावे और चीनी सरकार ने इससे साफ इनकार किया है.

 चीन हर मंच पर भारत के खिलाफ पाकिस्तान का साथ देता आ रहा है. सूचना तकनीक के क्षेत्र में चीन भारतीय  सॉफ्टवेयर उद्योग को अपने देश में आने से रोकता है. जबकि हुवावे को भारत में 5G परीक्षण की मंजूरी राष्ट्रीय सुरक्षा से खिलवाड़ करने वाला कदम है. हालांकि अभी यह मंजूरी सिर्फ परीक्षण तक सीमित है.

तेजी से बदलती तकनीकी दुनिया में हम सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ सकते. 5G की तकनीक भी जरूरी है. जिससे हम विश्व के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकते हैं. आज भारत में 55 करोड इंटरनेट उपभोक्ता है. जो इंटरनेट के माध्यम से विश्व भर से जुड़े हुए हैं. जो भारत की आबादी का लगभग 40% है. भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग, इंटरनेट एवं वायरलेस तकनीक के हित आपस में सांझा हैं. 

आने वाला समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमता) का है. 5जी तकनीक और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मिलकर नए-नए रोजगार के अवसर पैदा करने में सक्षम हैं. भारत एक युवा देश है. रोजगार संबंधी आंकड़े बताते हैं कि बेरोजगारी की दर भारत में पिछले 45 वर्षों में सबसे ज्यादा है. भारतीय सॉफ्टवेयर उद्योग को भी बदलती तकनीक और परिस्थितियों के साथ कदम मिलाकर चलना पड़ेगा. विद्यार्थियों को भी भविष्य में बाजार की मांग को देखते हुए अपने कैरियर चुनने की जरूरत पड़ेगी. 

 पिछले दिनों चीन के एक टेलीविजन समाचार चैनल में रोबोटिक न्यूज़ एंकर द्वारा समाचार प्रसारण का सफल परीक्षण हो चुका है. वह दिन दूर नहीं जब कंपनियों के मैनेजिंग बोर्ड में इंसान नहीं अपितु कृत्रिम बुद्धिमता से लैस रोबोट होंगे. जो रियल टाइम डाटा के आधार पर भविष्य के लिए निर्णय लेंगे. भविष्य में 5G तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता से स्मार्ट सिटी, कृषि, स्वास्थ्य तथा शिक्षा क्षेत्र में आमूलचूल परिवर्तन होंगे. ऐसे में देश में डाटा की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चुनौती होगी. 

आज सभी प्रकार की सूचनाओं का आदान-प्रदान ईमेल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर होता है. भारत में प्रतिदिन करोड़ों डिजिटल लेनदेन होते हैं. यह सभी सूचनाएं उन सर्वर और कंट्रोल सेंटर पर सुरक्षित होती हैं, जो विदेशी धरती पर स्थापित है. यह सारा डाटा राष्ट्रीय सुरक्षा और व्यापार से संबंधित भी होता है.  जिसके साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ या चोरी किसी भी राष्ट्र की संप्रभुता के लिए खतरनाक है. यह कंपनियां इस डेटा को अपने व्यवसायिक हितों को ध्यान में रखते हुए कई बार दूसरी कंपनियों को भी बेच देती है. यह डाटा हैकिंग जैसे अवैध तरीकों से भी प्राप्त किया जा सकता है. इससे कई बार देशों में राजनीतिक माहौल को भी बिगाड़ा जाता है. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण अमेरिका के राष्ट्रपति चुनाव में रूस के हस्तक्षेप के आरोपों से सिद्ध होता है.

डाटा प्रबंधन और सुरक्षा पर भारत की विदेशियों पर निर्भरता के दुष्परिणाम देश ने कारगिल युद्ध के समय भी देखे थे. जब अमेरिका ने अपने राजनीतिक फायदे के लिए पाकिस्तान की सीमा चौकियों की जीपीएस लोकेशन देने से मना कर दिया था. बहुराष्ट्रीय कंपनियां किसी भी देश के डाटा को एल्गोरिदम विश्लेषण के बाद उस देश में अपनी व्यापारिक रणनीतियां तय करने में इस्तेमाल करती हैं. भारत सरकार को बहुराष्ट्रीय कंपनियों पर इस प्रकार का दबाव बनाया जाना चाहिए कि भारतीय नागरिकों का संपूर्ण लाटा भारत में ही स्टोर किया जाए.   किसी भी प्रकार की अपराधिक कार्यवाही के विरुद्ध दोषी कंपनियों पर भारतीय कानूनों के अनुसार मुकदमा किया जाए.

रोजगार को लेकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रति शंका प्रकट की जा रही है. जब कंप्यूटर भारत में आया था तब भी इसी प्रकार की शंका प्रकट की गई थी. लेकिन विश्व आर्थिक मंच की वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार विश्व में वर्ष 2022 तक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (कृत्रिम बुद्धिमत्ता) 75 मिलीयन नौकरियों में बदलाव करेगी तथा 58 मिलियन अतिरिक्त नौकरियां भी पैदा होंगी. 

वर्तमान में आपसी सहयोग पर निर्भर विश्व में कोई भी देश एकांकी नहीं रह सकता. पांचवी पीढ़ी (5G) की दूरसंचार तकनीक तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के मामले में भी पीछे नहीं हटा जा सकता. क्योंकि यह वर्तमान की सच्चाई है. सरकार और निजी क्षेत्र को इससे जुड़े मसलों पर विचार-विमर्श करके भविष्य के प्रति आशंकाओं का निराकरण करने का प्रयास करना चाहिए.

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 विश्व के लिए खतरा है चीन