चीन पर जरूरी है आर्थिक चोट

 चीन पर जरूरी है आर्थिक चोट
 चीन पर जरूरी है आर्थिक चोट

 चीन पर जरूरी है आर्थिक चोटजब से कश्मीर में अनुच्छेद-370 हटाया गया है पाकिस्तान इस तरह कुलबुला रहा है जैसे किसी कुत्ते की पूंछ  गाड़ी के नीचे गई हो i जब कोई कुत्ता भोक्ता है तो उसका साथी भी कुछ कुछ उसी तरह चिल्लाने लगता है i ठीक यही हाल आजकल चीन का हुआ है जो पाकिस्तान के सुर में सुर मिला रहा है i पाकिस्तान  का दर्द तो समझ में रहा है जो पिछले 75 सालों से उसने अपने आवाम को कश्मीर के जिस हसीन सपने को दिखा-दिखा कर बरगला कर रखा था वही जनता अब अपने सियासत दानों से हिसाब मांग रही है i विदेशों में बसे पाकिस्तानी कभी अपने यूएनओ की प्रतिनिधि आरोप लगा रहे हैं तो कभी इंग्लैंड में पाकिस्तान के भूतपूर्व रेल मंत्री पर अंडे फेंके जा रहे हैं i

 
चीन का मामला थोड़ा अलग है I पाकिस्तान हर बार अंतरराष्ट्रीय थप्पड़ खा कर रोता हुआ चीन के पास जाता है I चीन उसे दिलासा देता है i चीन को भी पता है पाकिस्तान थप्पड़ के लायक ही है लेकिन चीन शातिर पड़ोसी की तरह और अपना बड़प्पन दिखाने के लिए यूएनओ की पंचायत करवा देता है I बंद दरवाजे की पंचायत से भी निराश होकर लौटना पड़ता है i

 चीन पाकिस्तान के साथ कश्मीर के मुद्दों पर इसलिए खड़ा हुआ है क्योंकि पाक अधिकृत कश्मीर में चीन द्वाराचीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारेके निर्माण के लिए बहुत बड़ी मात्रा में निवेश किया हुआ है i भारत द्वारा पाक अधिकृत कश्मीर को लेकर संसद में भी अपने इरादे जाहिर कर दिए हैं I चीन को पाकिस्तान की चिंता नहीं बल्कि अपने निवेश की चिंता है i अमेरिका के साथ बढ़ती व्यापारिक द्वंद के कारण उसके निर्यात सिकुड़ रहे हैं I अर्थव्यवस्था की विकास दर 6% पर चुकी है ऐसे में अगर चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा खटाई में पड़ गया तो आर्थिक महाशक्ति बनने का चीन का सपना टूट सकता है i

 चीन ऐसा पंचायती है जिसका अपना मानवाधिकार का रिकॉर्ड गंभीर है I चीन  द्वारा अपने क्षेत्र में मुसलमानों को उनके धार्मिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और मजे की बात तो यह है कि  इस्लामिक देश पाकिस्तान को इससे कोई भी शिकायत नहीं है I चीन और पाकिस्तान की धार्मिक अल्पसंख्यक जनता के अधिकारों के हनन के मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र संघ की बैठक में भी निंदा की गई है i

 चीन द्वारा प्रशासित क्षेत्र हांगकांग पिछले कई महीनों से सुलग रहा है i इंग्लैंड  के अधीन 99 साल तक पट्टे पर रहने के बाद हांगकांग को चीन को सौंप दिया गया था I क्योंकि वहां की राजनीतिक व्यवस्था चीन की साम्यवादी व्यवस्था से अलग है और खुली हुई है लेकिन अब चीन वहां भी नागरिक अधिकारों का हनन कर नया प्रत्यर्पण कानून लागू करने की प्रयास कर रहा है I जिससे हांगकांग में व्यक्तियों पर  चीन में प्रत्यर्पण करके उन पर कानूनी कार्रवाई की जा सकती है i हांगकांग के निवासी इसका विरोध कर रहे हैं और चीन के खिलाफ लाखों युवा सप्ताहअंत के में सड़कों पर उतर कर विरोध करते हैं I हांगकांग के छात्र नेताओं को ताइवान ने अपने देश में राजनीतिक शरण देने की पेशकश कर दी है iअंतरराष्ट्रीय स्तर पर लोकतंत्र समर्थक देशों का यह अनुमान है कि चीन 1989 की तरह उस लोकतंत्र विरोधी घटना को दोहरा सकता है जिसमें लोकतंत्र के पक्ष में प्रदर्शन कर रहे हजारों युवकों पर टैंक चढ़ा दिए गए थे i

चीन भारत के हितों के खिलाफ कोई भी मौका नहीं छोड़ता, चाहे परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) में भारत की सदस्यता का मामला हो या संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत की स्थाई सदस्यता का I कश्मीर में अनुच्छेद-370 के हटने के बाद पैदा स्थिति में चीन खुलकर सामने चुका है इसलिए हमें भी स्थिति में अपना विरोध दर्ज कराना होगा I यह विरोध चीनी व्यापार पर आर्थिक चोट करने से बेहतर कुछ नहीं हो सकता i वर्तमान में चीन और अमेरिका का व्यापार युद्ध निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है i अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी कंपनियों को चीन से अपना व्यापार और निर्माण इकाइयां समेटने का आदेश दे दिया है ताकि चीन को सबक सिखाया जा सके i अगर अमेरिकी कंपनियां वहां से अपना व्यापार समेट लेती हैं तो उनके लिए भारत में संयंत्र लगाना एक पसंदीदा स्थान हो सकता है i जिससे चीन को आर्थिक क्षति पहुंचेगी और भारत में रोजगार का अवसर बढ़ेगा i

 एक छोटा सा कार्य भारत के नागरिक के रूप में चीनी सामानों का बहिष्कार करके कर सकते हैं I जब हम एक राष्ट्र के रूप में खड़े होंगे तब चीन की सरकार को झुका सकते हैं I  चीन के साथ हमारा व्यापार घाटा पिछले कुछ वर्षों में घटा है i हम इन प्रयासों से इसे निर्णायक रूप से कम कर सकते हैं तथा भारत को एक वैश्विक स्तर पर आर्थिक महाशक्ति के रूप में खड़ा कर सकते हैं i

भारत में आर्थिक विषयों पर चिंतन करने वाले संगठन संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने मैं देशभर में जिलाधिकारियों के माध्यम से  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक ज्ञापन सौंपने की मुहिम चलाई है I ताकि केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर में 12 से 14 अक्टूबर 2019 को होने वाले ग्लोबल इन्वेस्टमेंट सम्मिट में चीनी कंपनियों के निवेश पर प्रतिबंध लगाया जा सके तथा उन्हें ग्लोबल इन्वेस्ट सम्मिट में भाग लेने की इजाजत नहीं दी जाए तथा साथ ही साथ उन भारतीय कंपनियों को भी जम्मूकश्मीर के क्षेत्र में निवेश की इजाजत  दी जाए जिनमें काफी मात्रा में चीनी निवेश किया हुआ है i

 चीन की जनसंख्या बूढी हो रही है I उसकी विकास दर सी घटती जा रही है आर्थिक मंदी की आहट में चीन सहमा हुआ है I हांगकांग जैसे क्षेत्र में लोकतंत्र समर्थक आवाजें उठ रही हैं चीन की साम्यवादी व्यवस्था का विरोध उसके ही घर में होने लगा है I पड़ोसी ताइवान भी उसी आंखें दिखाने लगा है I ऐसे में भारत को मुखर होकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हांगकांग जैसे मुद्दों पर चीन के विरोध में खड़ा होना होगा ताकि चीन को साफ शब्दों में बताया जा सके कि जिनके घर शीशे के होते हैं वह दूसरों के घर पर पत्थर नहीं फेंका करते i

Post a Comment

0 Comments

कुछ तो हो