कुलभूषण जाधव के मामले में भारत की जीत



कुलभूषण जाधव के मामले में भारत की जीत
कुलभूषण जाधव के मामले में भारत की जीत

17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय - हेग (नीदरलैंड) से भारत के लिए एक सुकून और राहत की खबर आई कि भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी सैन्य अदालत द्वारा सुनाई गई फांसी की सजा पर रोक लगा दी गई है | इसके अलावा कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान कोवियना-समझौते  के उल्लंघन का दोषी भी पाया गया | कुलभूषण जाधव को राजनयिक सहायता प्रदान करने का आदेश भी दिया है |

 अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह भारत की एक बड़ी जीत है | वरिष्ठ वकील श्री हरीश साल्वे ने इस केस की बहुत मजबूत पैरवी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में की थी | उसी का परिणाम रहा कि 16 न्यायाधीशों में से 15 न्यायाधीशों ने भारत के पक्ष में अपना निर्णय दिया | केवल पाकिस्तानी जज ने ही इसका विरोध किया | भारत की यह जीत कानूनी के साथ-साथ कूटनीतिक जीत भी है | कुलभूषण जाधव की सुरक्षित स्वदेश वापसी अभी भी दूर है लेकिन यह उस दिशा में महत्वपूर्ण कदम है |

 17 जुलाई को ही मुंबई हमले का मास्टरमाइंड हाफिज सईद को भी पाकिस्तान में गिरफ्तार कर लिया गया | हालांकि हाफिज सईद पहले भी कई बार पाकिस्तान द्वारा गिरफ्तार किया जा चुका है | लेकिन वह कुछ दिनों के बाद फिर छोड़ दिया जाता है | इससे एक दिन पहले 16 जुलाई को पाकिस्तान ने भारतीय वायुयानों के लिए अपना हवाई क्षेत्र खोल दिया था | जो बालाकोट में हुई एयर स्ट्राइक के बाद से बंद था | भारत ने इसके लिए पहले आग्रह भी किया था | क्योंकि भारतीय यानों को वकल्पिक मार्गो से ले जाना लागत की दृष्टिसे महंगा पड़ रहा था और समय भी ज्यादा लगता था | पाकिस्तान ने भारत के आग्रह को यह कहकर अस्वीकार कर दिया था कि  जब तक भारत अपने अग्रिम एयरफील्ड से अपने फाइटर जेट नहीं हटा लेता तब तक वह भारतीय वायुयानों के लिए अपना एयरस्पेस नहीं खोलेगा | पाकिस्तान की इस नाजायज मांग पर भारत ने कोई ध्यान नहीं दिया और मजबूरन पाकिस्तान को अपना एयरस्पेस भारतीय जहाजों के लिए खोलना पड़ा |

 इन सारी घटनाओं के पीछे पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान की आगामी अमेरिका यात्रा है | जिसमें वह राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मिलकर भारत के साथ वार्ता शुरू करने अमेरिका की मदद की उम्मीद लगाये बैठा है |  उपरोक्त कदमों से पाकिस्तान यह दिखाना चाहता है कि वह आतंकवाद से निबटने के लिए मन बन चुका चुका है और वह अपने यहां कई आतंकी संगठनों को प्रतिबंधित भी कर चुका है |

भारत सरकार द्वारा कश्मीर समस्या पर दो तरफा वार किया जा रहा है | कश्मीर घाटी में आजऑपरेशन ऑल आउटचल रहा है | जिसमें ज्यादातर हार्डकोर आतंकवादी मारे जा चुके हैं | अलगाववादी नेताओं पर कानूनी शिकंजा कसा जा रहा है | जिससे उनके वार्ता के लिए राजी होने के स्वर रहे हैं | पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग किया जा रहा है और इसके परिणाम भी आने शुरू हो गए हैं | 9 जुलाई को लोकसभा में गृह राज्यमंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया की घुसपैठ की घटनाओं में 43% की कमी आई है | आतंकी घटनाओं में 28% की तथा कश्मीरी स्थानीय युवाओं के आतंकी बनने की घटनाओं में 40% तक की कमी आई है | इससे जाहिर है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान दबाव में है तथा घरेलू स्तर पर अलगाववादियों के भी हौसले पस्त हुए हैं |

 कंगाली के कगार पर पहुंचे पाकिस्तान पर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स कीग्रे-लिस्टमें नाम होने से उसकी आर्थिक निगरानी की जा रही है | वर्तमान दौर में पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय दबाव में है | चाहे वह दिखावे के लिए ही सही परंतु आतंकी संगठनों और उसके आकाओं पर नकेल कसने का दिखावा कर रहा है | अगर फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स की अक्टूबर महीने में होने वाली मीटिंग में पाकिस्तान फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स को संतुष्ट नहीं कर पाया तो उसकोब्लैक-लिस्टकिया जा सकता है | जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान कोई भी वित्तीय मदद प्राप्त नहीं कर पाएगा |

 पाकिस्तान पर जितना दबाव प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में पड़ा है उतना पहले कभी नहीं रहा | पाकिस्तान पहले हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर कश्मीर मुद्दे को उठाता था | उसका अन्तराष्ट्रीयकरण करने का प्रयास करता था | लेकिन आज वह आतंकवाद के मुद्दे पर इतना घिर चुका है कि वह अब केवल भारत से वार्ता की गुहार लगा रहा होता है | पाकिस्तान  काबाल-सखा  चीन भी यदा-कदा पाकिस्तान को उसकी औकात दिखा देता है | भारत और चीन के संबंध आर्थिक और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ मुद्दों को छोड़कर अमूमन सहयोगी रहे हैं | चीन कई बार पाकिस्तान के विरुद्ध भारत के पक्ष में मतदान कर चुका है | कुलभूषण जाधव के मामले में भी अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में चीनी जज ने भारत के पक्ष में निर्णय दिया  है |

भारत को अपने कूटनीतिक और अंतरराष्ट्रीय मंचों का सदुपयोग करते हुए कुलभूषण जाधव की सुरक्षित स्वदेश वापसी की कोशिशों को नए सिरे से प्रयास किए जाने की आवश्यकता है | वर्तमान में पाकिस्तान अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रहा है | यह ऐसा समय है जिसमें अगर भारत सरकार सही रणनीति अपनाएं तो कश्मीर समस्या का स्थाई समाधान हो सकता है और पाकिस्तान को भी  उसकी हैसियत का अहसास कराया  जा सकता है |


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