मोदी सरकार 2.0 की चुनौतियां

मोदी सरकार 2.0 की चुनौतियां
मोदी सरकार 2.0 की चुनौतियां

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारतीय जनता पार्टी को मिली प्रचंड जीत ने मोदी सरकार को दूसरे कार्यकाल में देश को विकास पर आगे बढ़ाने का विश्वास दिया है | इस बात को प्रधानमंत्री मोदी भी भली-भांति समझते हैं | 2014 से 2019 के बीच एनडीए की सरकार ने आर्थिक, अंतरराष्ट्रीय, स्वच्छता कौशल विकास पर प्रशंसनीय कार्य किया था | पिछले 5 साल का कार्यकाल भारतीय रक्षा नीति के क्षेत्र में भी स्मरणीय रहेगा |

 आजादी के बाद यह है प्रथम बार है कि जब कोई गैर कांग्रेसी सरकार पूर्ण बहुमत से सत्ता लौटी है और यह बात प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी को भी पता है कि स्पष्ट बहुमत वाली सरकारों से देश को अपेक्षाएं भी ज्यादा होती हैं | मोदी सरकार की सबसे बड़ी उपलब्धि सार्वजनिक जीवन में शुचिता लाने के प्रयास के रूप में देखी जा सकती है | 2014 से 2019 के दौरान सरकार पर कोई भी भ्रष्टाचार का मामला उजागर नहीं हुआ | इस कार्यकाल में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ तथा कई अन्य विकास के पैमाने पर उल्लेखनीय वृद्धि हुई है | भारत विश्व की छठी अर्थव्यवस्था बन चुका है और विश्वास है कि हम जल्दी ही विश्व की पांचवी बड़ी अर्थव्यवस्था बन जाएंगे |

 मोदी सरकार 2.0  की प्रथम प्राथमिकता रोजगार के अवसर बढ़ाने की है | यह चुनौती आसान नहीं है क्योंकि पिछले दिनों जारी सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2017-18 में बेरोजगारी की दर  6 .1 प्रतिशत रही जो पिछले चार दशकों में सबसे उच्चतम स्तर पर है | भारत जैसे युवा जनसंख्या वाले देश के लिए यह एक गंभीर समस्या है | चुनाव के दिनों में इस मुद्दे को लेकर विपक्षी दल कांग्रेस ने  चुनाव में मुद्दा बनाने की कोशिश की थी और यह वास्तव में मुद्दा भी था लेकिन कांग्रेस पार्टी की विश्वसनीयता इतनी निम्न स्तर पर थी कि भारत के वोटरों ने  कांग्रेस पार्टी को गंभीरता से नहीं लिया | प्रधानमंत्री मोदी ने शपथ ग्रहण के बाद ही रोजगार सृजन की दिशा में एक मंत्री स्तरीय कमेटी का गठन किया है |

 रोजगार से ही जुड़ा एक अन्य मुद्दा कौशल विकास का भी है | प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से देश भर में कौशल विकास केंद्र खोले गए हैं | लेकिन देखने में आया है कि इनमें से ज्यादातर केंद्र भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुके हैं | जहां पर फर्जी आंकड़ों के माध्यम से सरकार से पैसा ले लिया जाता है | कौशल विकास मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के माध्यम से लगभग 41 लाख युवाओं ने कौशल विकास का प्रशिक्षण लिया जिसमें से 6.15 लाख ही रोजगार पा सके |

रोजगार सृजन की जिम्मेदारी सरकार की है |लेकिन सरकार सोचती है कि यह है निजी निवेश के माध्यम से होगा | इसके लिए एफडीआई के माध्यम से निवेश आकर्षित करने की कोशिश रहती है | लेकिन यह भी सच्चाई है कि एफडीआई या निजी निवेश से ही इस गंभीर समस्या का निवारण नहीं हो सकता क्योंकि निजी निवेश या एफडीआई उच्च तकनीक और सेवाओं पर आधारित होता है | जिसमें रोजगार के अवसर सीमित होते हैं | मोदी सरकार को आधारभूत संरचना में और ज्यादा निवेश करना होगा जिससे निवेश के अनुकूल माहौल बने और साथ ही साथ रोजगार के अवसर भी पैदा हो ताकि इस समस्या का निवारण हो सके | एक सच्चाई यह भी सामने आती है कि औद्योगिक जगत को यह शिकायत रहती है कि हमें कुशल कामगार नहीं मिलते | निजी इंजीनियरिंग कॉलेज  तथा पॉलिटेक्निक  कॉलेजों से प्रशिक्षित छात्र उद्योग की जरूरतों को पूरा नहीं कर पाते | सरकार को इस दिशा में भी बहुत ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि शिक्षा के नाम पर निजी इंजीनियरिंग कॉलेज संचालक सिर्फ अपनी जेब भर  कर  छात्रों के भविष्य से खेल रहे हैं |

 मोदी सरकार की दूसरी चुनौती अर्थव्यवस्था में आई सुस्ती भी है | पिछली तिमाही में अर्थव्यवस्था की विकास दर 5 .8 दर्ज की गई | जो पिछली 14 तिमाहियों में सबसे निम्न थी | इसी को ध्यान में रखकर जून के प्रथम सप्ताह में रिजर्व बैंक ने अपनी आर्थिक समीक्षा के दौरान ब्याज दरों में 0.25 अंकों की कटौती की है | इससे एक तो बाजार में तरलता बढ़ेगी जिससे विकास का पहिया भी घूमेगा |

 मोदी सरकार की तीसरी चुनौती कृषि का मुद्दा है | जिससे कोई भी सरकार इंकार नहीं कर सकती | देश के जनमत में कांग्रेस पार्टी की कर्ज माफी को ठुकरा दिया है | लेकिन यह समय कृषि क्षेत्र के लिए कुछ ठोस कार्य रूप देने का है | किसान सम्मान निधि त्वरित सहायता तो हो सकती है परंतु समाधान नहीं है | किसानों को उनकी फसल का उचित और लाभकारी मूल्य मिले यह सरकार को सुनिश्चित करना होगा | कृषि क्षेत्र के विकास के बिना बेरोजगारी की समस्या हल नहीं हो सकती | इसी से जुड़ी एक अन्य समस्या गांव से शहरों में पलायन है | अगर कृषि और उससे संबंधित खाद्य प्रसंस्करण उद्योग हम गांव में ही स्थापित कर दें तो स्थानीय युवाओं को अपने आसपास के क्षेत्र में ही रोजगार मिल सकता है तथा वे कम वेतन में भी एक स्तरीय जीवन यापन कर सकते हैं | इसके विपरीत अगर कल कारखाने शहरों में स्थापित होंगे तो ग्रामीण युवाओं को शहरों में पलायन करना पड़ेगा जिससे शहरी आबादी पर भी बोझ बढ़ेगा तथा युवाओं को कम वेतन में निम्न स्तर का जीवन यापन करना  पड़ेगा जिससे कई प्रकार की सामाजिक और पर्यावरण संबंधी समस्याएं बढ़ेंगी |

 मोदी सरकार की चौथी चुनौती संघीय ढांचे को बनाए रखने की भी है  | चुनावी अभियान के दौरान  जिस प्रकार की कटुता देखने को मिली उसका असर भारतीय संघीय ढांचे पर पड़ना शुरू हो गया है | राज्य सरकारें केंद्र की नीतियों को लागू करने में प्राथमिकता के आधार पर कार्य नहीं कर रही है | अभी हाल ही में दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आयुष्मान योजना को लागू करने से इनकार कर दिया | यही हाल पश्चिम बंगाल का है जहां पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने नीति आयोग की बैठक का बहिष्कार किया और वे सार्वजनिक मंच से कह चुके हैं कि वे  मोदी को अपना प्रधानमंत्री नहीं मानती | यह देश के जनमत का निरादर है और हम यह भी सोचना होगा कि देश का संविधान हमें इस प्रकार के व्यवहार की इजाजत नहीं देता | आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू और ममता बनर्जी ने अपने-अपने राज्यों में सीबीआई को किसी भी मामले की जांच की अनुमति देने से मना कर दिया था | इस प्रकार की स्थितियां गंभीर संवैधानिक संकट बन सकती हैं |

मोदी सरकार की  पांचवी चुनौती अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच चल रहे व्यापार युद्ध के मध्य में भारत के संतुलन को लेकर रहेगी | पूर्व विदेश सचिव एस जयशंकर को विदेश मंत्री के रूप में मंत्रिमंडल में जगह देकर प्रधानमंत्री मोदी ने इसका आगाज भी कर दिया है क्योंकि भारतीय विदेश सेवा में रहते हुए हैं एस जयशंकर ने चीन तथा अमेरिका दोनों देशों में अपनी सेवाएं दी हैं तथा इन सरकारों और वहां की कार्य प्रणालियों से भलीभांति परिचित हैं | अमेरिका के साथ डॉ मनमोहन सिंह के कार्यकाल के दौरान भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते में एस जयशंकर की महत्वपूर्ण भूमिका थी | चीन द्वारा भारत के पड़ोसी देशों को अपने प्रभाव में ले कर भारत के खिलाफ एक माहौल बनाने की चीन की कोशिशों को विराम लगाना प्रधानमंत्री मोदी की प्राथमिकता है और उन्होंने इस दिशा में कार्य भी शुरू कर दिया है | अपने शपथ ग्रहण समारोह में बिम्सटेक के सदस्य देशों को आमंत्रित करके इसका इशारा भी कर दिया है | प्रधानमंत्री ने अपने दूसरे कार्यकाल की पहली विदेश यात्रा मालदीव तथा श्रीलंका से शुरू की है तथा विदेश मंत्री का पहला दौरा भूटान का हुआ है | यह प्रधानमंत्री कीपड़ोसी पहलेनीति का आगाज है | मालदीव में मजलिस को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने बिना नाम लिए पाकिस्तान को पड़ोसी देशों से भी अलग-थलग करने का प्रयास किया है तथा इसके साथ-साथ चीन द्वारा अप्रत्यक्ष रूप से आतंकवाद को समर्थन करने के लिए आड़े हाथों लिया है |

 कश्मीर को लेकर धारा 370, 35A तथा परिसीमन जैसी चुनौतियां भी सामने हैं | देश का जनमत अतिशीघ्र राम मंदिर का निर्माण अयोध्या में चाहता है | इस दिशा में भी प्रयास वर्तमान सरकार को अतिशीघ्र करने होंगे | एनडीए सरकार का राज्यसभा में बहुमत  नहीं होना भी एक चुनौती था लेकिन कुछ ही दिनों पश्चात वहां पर भी बहुमत हो जाएगा जिससे वर्तमान सरकार अपने बिलों को आसानी से पास करवा सकती है |


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