हलचल


हलचल (लघुकथा)

शहर में बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में धार्मिक स्थल भी उगने लगे थे | सरकारी जमीन पर अतिक्रमण के लिए धार्मिक स्थल बन रहे थे, या धार्मिक स्थल बनाने के लिए अतिक्रमण किया जा रहा था | कुछ समझ में नहीं रहा था |

कहीं सड़क के बीचो बीच भोलेनाथ विराजमान थे, तो कहीं मजार में हरी चादर ओढ़े लंबा सा पीर गहरी नींद सोया था | ऊँची-ऊँची गुबंदों से आती कानफोडू आवाज शहर भर की नींद हराम कर रही थी |

एक अरसे बाद कोर्ट ने प्रशासन को कुंभकरणी नींद से जगाया | सरकार भी जागी | स्मार्ट सिटी के सपने को धरातल पर लाने के लिए सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाया जाना निश्चित हुआ |

जैसे ही बुलडोजर चला, शहर को धार्मिकता की लू  ने अपनी चपेट में ले लिया | शहर अंदर ही अंदर सुलगने लगा | कुछ बेरोजगार नेताओं को इस धुएं में बादल नजर आने लगे जो थोड़ी कोशिशों के बाद वोटों की बरसात कर सकते थे | पत्रकारों की कलम चलने लगी, कैमरों के फ्लैश चमकने लगे जो अगले दिन अखबारी कागज पर चिपक जाते थे|

टीवी के एंकर फोन करके ऐसे महाशयों को बुलाने में व्यस्त हो गए जो स्टूडियो में आकर डिबेट के दौरान धर्म के नाम पर कुत्तों की तरह लड़ सकते थे |


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