निराशा में आशावाद : कीचड़ में कमल




पुस्तक    : कीचड में कमल (लघुकथा संग्रह )
लेखक     : राधेश्याम भारतीय
प्रकाशक : अयन प्रकाशन, दिल्ली |
मोबाइल  : 9315382236
ई -मेल     : rbhartiya74@gmail.com

राधेश्याम भारतीय का सद्यः प्रकाशित लघुकथा संग्रह ‘कीचड़ में कमल’ वस्तुतः समाज में साहित्य की प्रासांगिकता को रेखांकित करता है। हमारे समाज के आस-पास लोकतंत्र शासन, न्यायपालिका में अनेक अंतर्विरोधों के वावजूद  लेखक आदर्श की तलाश में रहता है। इस तलाश में हमारे में से कितने ही निराशावादी बन जाते हैं लेकिन राधेश्याम भारतीय ने अपने प्रथम लघुकथा संग्रह‘ अभी बुरा समय नहीं आया है’ के बाद ‘कीचड़ में कमल’ में भी यही आशावाद दर्शाया है।


इस संग्रह में गांव की राजनीति, किसानों की स्थिति, भ्रष्टाचार ,पीढ़ी अन्तराल, ग्रामीण परिवेश में बदलते सामाजिक एवं राजनीतिक विचारधाारा तथा स्वधर्मिता के अंर्तद्वद्व को बखूबी उकेरा है।


संग्रह की पहली ही रचना 'काला अध्याय’ जुर्म व सच के एक अलग पहलू को उजागर करती है जिसमें जेल से बाहर पारिवारिक सदस्य भी सजा भुगते है । गा्रमीण राजनीति के ताने-बाने और पंचायती व्यवस्था के अंतद्वद्व को ‘षडयंत्र’, ‘अबकी बार’, ‘ईमानदारी के पुतले’ ,‘चुनाव’ और ‘नई परिभाषा’ के माध्यम से स्पष्ट करने का प्रयास सफल रहा है। जातिवाद पर कई लघुकथा अवलोकनीय हैं। इसमें ‘बिरादरी’ लघुकथा विशेष उल्लेखनीय है। जहां गांव से शहर में आते ही जाति वर्ग में परिवर्तित हो जाती है। ‘आजादी’ शीर्षक से दो लघुकथाएं एक अन्य पहलू उजागर करती हैं। आजादी-1 में शिक्षा द्वारा नई पीढ़ी कर्ज से मुक्ति दिलाती है। और आजादी-2 में घर में शिक्षित बहू आने से परिवार की अन्य महिलाओं को भी पर्दाप्रथा से मुक्ति मिल जाती  है। बदलते हरियाणवी सांस्कृतिक परिवेश को यह लघुकथा सफलतापूर्वक पाठक तक ले जाती है।

‘कोट’ लघुकथा अपने आपमें अनोखी है। जिसमें बच्चें की खुशी के लिए बाबा अपनी जीवन भर की  वेशभूषा में परिवर्तन को राजी हो जाता हैं। इसका एक पहलू यह भी है कि वह कोट बेटे का है। जो पिता के प्रति बेटों की मानसिकता को इंगित करता है।'घेरा' लघुकथा में राजनीतिक विचाराधारा रचनाधर्मिता और साहित्यिक सम्मानों के वितरण में अपने-पराये की विचाराधारा के मोह को बहुत अच्छे से रचित किया गया है। पति-पत्नी और बच्चों के विषय को लेकर इस संग्रह में कई लघुकथाएं हैं। ‘सुख’ में नि‘सतान दंपति का आपसी प्रेम ‘पुल’ में दम्पति के बीच आपसी अनबन के लम्हों में बच्चों का ‘पुल’ बन जाना तथा ‘औरत’ लघुकथा में पत्नी बच्चे के जन्म के बाद मां  में परिवर्तित हो जाती है। वह संग्रह की लघुकथाओं में रिश्तों की उधेडबुन को सुन्दरता प्रदान की है।


‘चेहरे’ लघुकथा के माध्यम से व्यक्तिगत जीवन और सार्वजनिक जीवन के बीच सोच की खाई दिखाया गया है। गृहस्थ जीवन में किस प्रकार छोटे-छोटे पलों और खुशियों को सहेज सकते हैं। ‘आत्मसुख’ के माध्यम से बताया गया है कि अपने आगंन में उगे पेड़ के फल का आत्मसुख पति को होता है जबकि फल पत्नी खा रही होती है। भारतीय किसान की व्यथा-कथा का ‘गणित’ हमेशा पेचीदा रहा है। कभी यह ‘पीड़ा’ के रूप में आता है तो कभी ‘अंतिम इच्छा' के रूप में । हरियाणा में लैंगिक असमानता और कन्या भूर्ण हत्या के कारण अन्य प्रदेशों से मूल्य चुकाकर वधु को लाया जाता हें | ‘सपनों का राजकुमार’ के माध्यम से उस बहु के उपर हो रहे अत्याचार के बारे बताने का प्रयास किया है।
श्री राधेश्याम भारतीय अपना लघुकथा संग्रह "कीचड में कमल" भेंट करते हुए |
किसी की सामाजिक आर्थिक राजनीतिक समस्या के कई पहलू होते हैं। राधेश्याम भारतीय का लघुकथा संग्रह ‘कीचड़ में कमल’ समाज और व्यवस्था में व्याप्त कीचड़ और उसमें भी कमल की संभावनाओं का दस्तावेज है। कीचड़ अगर निराशावादी  व यथार्थवादी दृष्टिकोण है तो कमल आशावादी की नई कली है जो कभी न कभी ठूठ बने पेड को उसके जिन्दा होने का सबूत दे जाती है।

शुभकामनाओं सहित |
दुलीचद कालीरमन
9468409948


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