नौकरियों में पारदर्शिता से बदल रहा है हरियाणा

नौकरियों में पारदर्शिता से बदल रहा है हरियाणा 


अभी तक हरियाणा में सरकारी नौकरियों का इतिहास और राजनीतिक वातावरण इस प्रकार का रहा था कि अगर किसी परिवार में किसी सदस्य की सरकारी नौकरी लगती थी तो यह सारे गाँव को पता होता था कि यह नौकरी कितने लाख में खरीदी गई है या फिर किस नेता ने “काम करवाया” है|

हरियाणा में सरकारी नौकरी में रिश्वत का आलम ये था कि गाँव की बैठक में हुक्के के चार्रों और बैठे या चौंक-चौराहे पर खड़े, सभी को नौकरियों के रेट पता होता था | नौकरी के मामले में सबसे बड़ी भ्रष्टाचार की नदी इंटरव्यू थी जिसमे कोई भी पारदर्शिता नहीं होती थी | वर्तमान सरकार ने सत्ता में आते ही ग्रुप सी व डी के पदों में इंटरव्यू को खत्म करके एक सराहनीय कार्य किया है जिससे पारदर्शिता बढ़ी है |


हरियाणा में ज्यादातर राजनीतिक पार्टियों की राजनीति केवल सरकारी नौकरियों पर आधारित थी | सभी को पता है कि हरियाणा के एक पूर्व मुख्यमंत्री का बुढ़ापा इसी पाप के कारण दिल्ली की तिहाड़ जेल में कट रहा है और जेल से बाहर उसी पार्टी का नेता ये हुंकार भर रहा है कि अगर उनकी सरकार आई तो सरकारी नौकरी केवल पार्टी कार्यकर्ताओं को ही दी जायेंगी |


हरियाणा में ये भी हुआ है कि HCS जैसी बड़ी नौकरियों का परिणाम आने से पहले ही अखबारों में यह खबर छप जाती थी कि फलां-फलां कैंडिडेट का चयन होगा और ये फलां-फलां नेता का पारिवारिक सदस्य है | पिछली HCS जैसी बड़ी नौकरियां केवल सत्ताधारी पार्टी के असंतुष्ट विधायकों और जुगाड़ वाले वरिष्ठ नौकरशाहों तक ही सीमित थी | कभी-कभी कोई धनाढय व्यक्ति पार्टी के किसी रसूखदार नेता के “चुनाव खर्च” के इंतजाम करने की एवज में कोई बड़ा पद हथिया जाता था | दिल्ली के मुखर्जी नगर में सिविल सर्विस की कोचिंग ले रहे युवा हरियाणा में अप्लाई नहीं करते थे क्योंकि उनको भी पता था कि वहां सिलेक्शन पारदर्शी नहीं है और वे असफल होकर कुंठित होना नहीं चाहते थे | आज तक भी माननीय हाई कोर्ट में उन सिलेक्शन पर केस चल रहे है |


जब से वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी की सरकार मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेत्र्तव में बनी है | सबसे महत्वपूर्ण बात यही हुई है कि सरकारी नौकरियों की नीलामी का दाग मिट गया है | आज सामान्य परिवारों के बच्चों को उनकी योग्यता के आधार पर सरकारी नौकरी मिल रही है | जो युवा पीढ़ी नौकरी के लिए सिर्फ नेताओं की “गणेश-परिक्रमा” में विश्वास करती थी वह आज कोचिंग और पढाई के रास्ते अपना भविष्य सवारने में व्यस्त है क्योंकि उसे पता है कि योग्यता हासिल करने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं है |



पिछले दिनों हरियाणा में ग्रुप-डी, हरियाणा पुलिस (पुरुष), हरियाणा पुलिस (महिला), पीजीटी (गणित), पीजीटी(भूगोल) और जितनी भी सिलेक्शन हुई है वे सभी योग्यता पर आधारित हुई है | इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात ये रही कि किसी किसी परिवार से दो-दो सिलेक्शन भी हुए है | अख़बारों के माध्यम से ऐसे समाचार छपे कि पिता और बेटी, भाई और बहन तथा दोनों बहनों का सिलेक्शन एक ही लिस्ट में हुआ | ये सभी सामान्य परिवारों से थे और कभी सपने में भी सरकारी नौकरी के बारे में उन्होने नहीं सोचा था | अगर किसी बच्चे का सिलेक्शन नहीं भी हुआ तो उसने सिलेक्शन पर ऊँगली नहीं उठाई बल्कि ये कहाँ कि सिलेक्शन पारदर्शी हुआ है और हम फिर से प्रयास करेंगे |


सरकारी नौकरियों में चयन की पारदर्शिता का सबसे सकारात्मक पहलु यह है कि हरियाणा के युवा तक यह बात पहुंची है कि राजनीतिक पहुँच की बजाय अगर पढाई पर ध्यान दिया जाये तो ही उसका भविष्य सुरक्षित होगा | दूसरी महत्वपूर्ण बात यह है कि पहले जो भी सरकारी नौकरी में भ्रष्टाचार के माध्यम से जाता था वह पद पर बैठते ही अपनी पूंजी पूरी करने के लिए भ्रष्टाचार के नये-नये तरीके अपनाता था जिससे प्रसाशन में भ्रष्टाचार फैलता था | योग्य उम्मीदवारों का पारदर्शी चयन होने से उनसे उच्च नैतिक मूल्यों की उम्मीद की जा सकती है जिससे प्रसाशन में भ्रष्टाचार को कम किया जा सकता है |


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