हृदय-परिवर्तन (लघुकथा )



हृदय-परिवर्तन (लघुकथा)
हृदय-परिवर्तन (लघुकथा)

आज एक और नेता का हृदय-परिवर्तन हो गया। अक्सर चुनाव नजदीक आते ही हृदय परिवर्तन की यह बीमारी राजनेताओं की प्रजाति में कुछ ज्यादा ही पाई जाती है। "सुरक्षित सीट का जुगाड़", "पार्टी के जीतने की संभावना", "सत्ता की मलाई में हिस्सेदारी" को  "नीतियों में विश्वास"  की चादर से ढ़कने की कोशिश की जाती है।

नेता जी नई पार्टी के मुख्यालय में कैमरों की चका-चौंध के पश्चात घर पहुंचा तो बंगले पर पुरानी पार्टी के लहरा रहे झंडे को तुरन्त उतारने का आदेश  अर्दली को दे दिया। पुरानी पार्टी के झंडे का उतारकर नई पार्टी का झड़ा लहराया गया।

"पुरानी पार्टी के झड़े का क्या किया जाये ? " अर्दली को चिंता हुई।

फिर जाने क्या सोचकर पहले उतारे गये पुरानी पार्टियों के झन्डो के साथ ही अलमारी में सुरक्षित रख लिया। नेताजी  के साथ रहकर इतना तो वह ज्ञान ले चुका था कि राजनीति संभावनाओं का खेल है और भविष्य में  भी  हृदय-परिवर्तन की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।

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कोरोना की जारी जंग को जीतने में कामयाब हुए तो यकीनन आने वाला कल हमारा होगा।