चाय पर चर्चा (लघुकथा)



चाय पर चर्चा (लघुकथा)
चाय पर चर्चा (लघुकथा)


विनीत और वन्दना का यही रूटीन था। सुबह की चाय टैरेस पर बैठकर साथ-साथ पीना। अक्सर चाय की चुस्कियों के बीच अखबार भी आ जाता है।


वन्दना अखबार पहले पढ़ती। उसे बाद में रसोई संभालनी होती। खास खबरों पर अक्सर दोनों में चर्चा होती। आज की खबर पढ़कर वन्दना का चेहरा मुरझा-सा गया।


”आये दिन इन अवैध संबंधों के कारण जाने कितने घर बरबाद हो रहे हैं। जो घर पर सुख नहीं पा सकता वह इस दलदल में क्या सुख पायेगा?“ उसने बुरा-सा मुंह बनाकर कहा।


विनीत वन्दना से अखबार लेकर पढ़ने लगा। मुख्य समाचार ही दिल दहलाने के लिए काफी था:

”ऑफिस की सहकर्मी से संबंध, दबाव बना तो हत्या की।“


”प्रेमी से मिलकर पति की हत्या।“


मुख्य पृष्ठ पर एक नहीं तीन समाचार इसी विषय को लेकर थे। उस सुबह बाकी अखबार नहीं पढ़ा गया। इसी विषय पर समाज में फैल रही अनैतिकता पर चर्चा की गई। कारणों पर विवेचन हुआ। जो इन संबंधों से बचकर चलता है, उसे समझदार की श्रेणी में रखा गया।


वन्दना के रसोई में चले जाने के बाद विनीत विचारों में खो गया। इसी उधेड़बुन में वह कभी अन्दर तक कांप जाता तो कभी संभलता।


आज ऑफिस जाते समय वह अपने कदमों के नीचे ठोस जमीन महसूस कर रहा था। रास्ते में उसे सड़क पर गड्ढे तो नज़र आ रहे थे लेकिन वह संभल कर चल रहा था। आज उसका चेहरा बाकी दिनों की अपेक्षा अधिक तेजमय था।


Post a Comment

0 Comments

लद्दाख में बढ़ती चीन की सेनाएं : हर छलछंद और जयचंद पर नजर रख आगे बढ़ने की आवश्यकता है