“सर्जिकल स्ट्राइक टू” का अभिनन्दन

विंग कमांडर अभिनन्दन
विंग कमांडर अभिनन्दन 


“सर्जिकल स्ट्राइक टू” का अभिनन्दन  
                     
14 फ़रवरी 2019 को पुलवामा में हुई आतंकी घटना के बाद भारत – पाक के बीच हुई तना-तनी के दौरान विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान की सकुशल भारत वापिसी के बाद रिश्तों की तल्खी थोड़ी कम हुई है | इस सारे घटनाक्रम में भारत के कुटनीतिक प्रयासों के साथ – साथ अंतर्राष्ट्रीय दबाव ने भी अपना काम किया है |

भारत की आंतकवाद के प्रति नई आक्रामक नीति

भारत ने इस बार एक नई आक्रामक नीति अपनाकर पाकिस्तान के खैबर पखतुनाबाद स्थित बालाकोट में जैश के आंतकी ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया | इससे इस क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर आ गया था | सर्जिकल स्ट्राइक-2 के बाद पकिस्तान जबरदस्त दबाव में था | बाद में पाकिस्तान ने अपनी जनता के रोष को कम करने के लिए अपने लड़ाकू विमानों द्वारा भारत के राजौरी क्षेत्र में घुसपैठ की कोशिश की लेकिन चौकस भारतीय वायुसेना के विमानों ने उन्हें समय रहते वापिस लौटने पर मजबूर कर दिया | इस दौरान पाकिस्तान का एक F-16 विमान मार गिराया गया | इस प्रयास में हमारा मिग-21 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया जिसमे सवार विंग कमांडर अभिनन्दन वर्धमान का पैरासूट उसे पाकिस्तानी सीमा में ले गया |

पाकिस्तान के प्रधानमन्त्री शुरू से ही बातचीत के लिए गिडगिडा रहे थे | विंग कमांडर अभिनन्दन की रिहाई को पाकिस्तान ने अपनी ढाल की तरह प्रयोग करने का प्रयास किया ताकि भारत को बातचीत की मेज तक लाया जा सके | भारत ने इसे मानने से इनकार कर दिया तथा पायलट को किसी प्रकार से टार्चर करने पर अंजाम भुगतने की धमकी भी दे डाली |
दुनिया के सभी बड़े देश लगभग भारत के पक्ष में खड़े नज़र आये | विश्व जानता है कि भारत और पाकिस्तान परमाणु शक्ति संपन्न देश है, इसलिए इन दोनों देशों के बीच एक हद से ज्यादा तनाव इस क्षेत्र और विश्व व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध हो सकता है | इस कारण अंतर्राष्ट्रीय दबाव भी पाकिस्तान पर ही ज्यादा रहा | पायलट अभिनन्दन की रिहाई में इस दबाव ने भी काम किया है | यह अलग बात है कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान इसे शांति की पहल दिखाना चाह रहे है|

अंतर्राष्ट्रीय घटनाक्रम और भारतीय कूटनीति

आज सारा विश्व एक दुसरे से जुड़ा है व्यापार और निवेश को लेकर सबके हित वैश्विक शांति और व्यवस्था में ही सुरक्षित है | पाकिस्तान के सदाबहार मित्र चीन का भी लगभग 62 बिलियन डालर चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे में लगा हुआ है | इस क्षेत्र में बढते संघर्ष से इस पूरे प्रोजेक्ट पर अँधेरा छा सकता है | जो चीन की अर्थवयवस्था किसी भी सूरत में सहन नहीं कर सकती | अमेरिका की भी अपनी मजबूरी है | वह अपनी सेनाओं को पिछले 17 सालों से युद्धरत अफगानिस्तान से निकालना चाहता है | इस्लामिक आंतकवाद को कमजोर करना अमेरिका के भी हित में है | यहाँ भारत और अमेरिका के हित साँझा है इसलिए वह भारत के पक्ष में खड़ा नज़र आ रहा है | अफगान युद्ध के दौरान वह पाकिस्तान का दोगलापन कई बार देख चूका है |
पाकिस्तान की रही-सही नाक इस्लामिक देशों के संगठन में कट गई | गौरतलब है कि पाकिस्तान इस संगठन का संस्थापक सदस्य है जिसमे भारत की विदेश मंत्री श्रीमती सुषमा स्वराज को “गेस्ट ऑफ़ ऑनर” के तौर पर आमंत्रित किया | पाकिस्तान ने इस निमंत्रण का विरोध किया था लेकिन इसे कोई तवज्जो नहीं दी गई| पाकिस्तान को ही इस सम्मलेन का बहिष्कार करना पड़ा | यह भारत की बहुत बड़ी कुटनीतिक जीत थी |

“सर्जिकल स्ट्राइक टू” के सैन्य पहलु 

पाकिस्तान और आंतकवाद के प्रति हमारे नज़रिये में परिवर्तन आया है | अभी तक हम आंतकवाद के विरुद्ध लड़ाई सिर्फ अपनी सीमा में लड़ रहे थे लेकिन मोदी सरकार द्वारा पहली बार आंतकवाद की फैक्ट्री पर धावा बोला गया है | हमारी सैन्य रणनीति का दूसरा पहलु यह रहा कि अभी तक सिर्फ थल सेना ही आंतकवाद के खिलाफ लड़ रही था लेकिन “सर्जिकल स्ट्राइक टू” में पहली बार आंतकवाद विरोधी कार्यवाही में वायुसेना का भी प्रयोग किया गया | जिसने सीमापार आतंकी ठिकानो पर सटीक कार्यवाही की है |

अभी तक पाकिस्तान पर ठोस कार्यवाही उसके “परमाणु बम ब्लैकमेल” के कारण नहीं हो पाती थी | इसका एक कारण कमजोर राजनीतिक इच्छाशक्ति भी थी | लेकिन पुलवामा की आंतकी घटना के बाद की तना-तनी ने पाकिस्तान की आर्थिक और सैन्य शक्ति की कमजोरी की पोल खोल दी | आर्थिक कंगाली की दहलीज पर खड़े पाकिस्तान के पास सात अरब डॉलर का विदेशी मुद्रा का रिज़र्व है जो कि भारत के मुकाबले कहीं भी नहीं ठहरता | आजकल पाकिस्तान के कटोरे में अमेरिका ने भीख डालनी बंद कर दी है और मात्र अरब देशों से मिलने वाली ज़कात ही उसका सहारा है |

चीन भी पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उसे और ज्यादा कर्ज देने के मूड में नहीं लगता | चीन को भी यह भली-भांति पता है कि भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य संघर्ष में उसका पाकिस्तान में किया गया निवेश डूब सकता है |

पाकिस्तान की जनता का टूटता भ्रम

पाकिस्तान की जनता अभी तक अपनी सेना के बारे में खुस्फह्मी में रहती थी | पाकिस्तान में राजनीतिक नेत्र्तव सेना के आगे भीगी-बिल्ली बना रहता था | लेकिन वर्तमान घटनाक्रम ने पाकिस्तानी सेना और सैन्य-शक्ति के बारे में पाकिस्तानी जनता की आँखें खोल दी है | झूठ पर झूठ बोलती पाकिस्तानी सेना को सच्चाई स्वीकार करने के लिए कई बार ब्यान बदलने पड़े |

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान को भी यह समझ में आ चुका है कि उसे आंतकवाद को प्रशय देने वाली अपनी पुरानी नीति को बदलना होगा अन्यथा भारत अपनी वैश्विक छवि, मज़बूत आर्थिक और सैन्य संसाधनों के बल पर आंतक के इस कोढ़ और ज्यादा दिन सहन नहीं कर सकता |

भारत की लड़ाई आंतक से है

भारत यह बात कई बार दोहरा चुका है कि उसकी लड़ाई पाकिस्तान से नहीं बल्कि आंतकवाद से है| एस बार की सर्जिकल स्ट्राइक टू में भी उसके निशाने पर आंतकी ठिकाने ही थे | पाकिस्तान कश्मीर को भारत से अलग करने के सपने देखते-देखते कहीं खुद ही न टूट जाये इसकी संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता |

  


Post a Comment

0 Comments

चीन-भारत संघर्ष के तात्कालिन कारण