हम सब चढे है समय की खराद पर



Time-is-a-leth-machine



मै, आप
हम सब चढे है
समय की खराद पर
बनते – बिगडते पल-प्रतिपल


कभी बनते-बनते चटख जाते किसी कोने से
और फिर से वही प्रक्रिया
अपने पुरातन व्यक्तित्व से
एक नयेपन की


बढई नहीं सुनता लकड़ी की
लुहार नहीं सुनता लोहे की
फिर आशा मेरी बेकार
कोई जानेगा मेरे विचार
मुझे मनचाहा ढालने से पहले


लकड़ी – लोहा जड़ तत्व
पर मै हूँ चेतन हर पल


हम कहाँ रह पाते है वैसे
जैसे होते है हम
मै, आप
हम सब चढे है समय की खराद पर
पल-प्रतिपल

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