हुर्रियत का हवाला रकैट और आतंकवाद

हुर्रियत का हवाला रकैट और आतंकवाद
Hurriyat 

हुर्रियत का हवाला रकैट और आतंकवाद

क्या है हुर्रियत ?

आल पार्टी हुर्रियत कांफ्रेस कहने को तो जम्मू-कष्मीर की 23 विभिन्न राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों का गठबंधन है। लेकिन वास्तव में यह घाटी के आतंकवादियों का राजनीतिक चेहरा है। कश्मीरी  पंडितों को घाटी से बाहर पलायन पर मजबूर करने वाला यह संगठन मानवाधिकारों की बात करता है। भारत सरकार से बातचीत से पहले यह पाकिस्तान में बैठे अपने आकाओ से दिशा -निर्देष लेता है। सही मायने में हुर्रियत का काम आज सिर्फ पाकिस्तान और घाटी के आतंकवादियों के बीच आर्थिक कड़ी का रह गया है। 

हुर्रियत कांफ्रेस के हवाला रकैट का भंडाफोड़

हुर्रियत कांफ्रेस के हवाला रकैट का भंडाफोड़ आखिर हो ही गया। एन.आई.ए. के अनुसार हुर्रियत के अलगाववादी नेताओं के घरों से छापों के दौरान घाटी के आतंकवादियों की सूची मिली है। इन सूचियों मे यह उल्लेख है कि कश्मीर  के किस क्षेत्र में कौन सा आतंकवादी सक्रिय है तथा वह किस तंजीम का है। हुर्रियत के नेता शहीदुल इस्लाम इसका पूरा ब्यौरा रखता था कि हिज्बुल-मुजाहिदीन, जैश -ए-मोहम्मद, अल-बद्र जैसे आतंकवादी संगठनों के 158 आतंकवादी घाटी में कहाँ-कहाँ है हुर्रियत की तरफ से इन सब आतंकवादियों को पाकिस्तान व खाड़ी के देषों द्वारा भेजा गया हवाला के माध्यम से पैसा पहुंचाया जाता है। जिससे वे घाटी में खून-खराबा जारी रख सके तथा पत्थरबाजों की भीड़ खड़ी कर सकें। शहीदुल इस्लाम को हुर्रियत के मीरवाईज उमर फांरूख का राजदार माना जाता हैं इन छापों मे कई आतंकवादी संगठनों के लैटरपैड भी मिले है। शहीदुल इस्लाम की एक फोटो सयैद सलाऊदीन के साथ मिली है। इन्हीं छापों की जांच के दौरान हुर्रियत के दूसरी श्रेणी के सात नेताओं को गिरफ्तार किया गया जिनमें हुर्रियत के चेयरमैन सयैद अलीषाह गिलानी के दामाद अल्ताफ शाह उर्फ अल्ताफ फंटूस, हुर्रियत के प्रवक्ता अयाज अकबर, बिटा कराटे, पीर सैफुल्ला, मेहराजुहीन और हुर्रियत से निलंबित नईम खान शामिल है।

टेरर फंडिंग का हुर्रियत कनेक्शन 

टेरर फंडिग के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है नित नये खुलासे हो रहे है। इसी कड़ी में हुर्रियत नेता शब्बीर शाह को वर्ष 2005 के मनी लांड्रिग केस मे गिरफ्तार किया गया है। शब्बीर शाह के करीबी असलम वानी को भी पवर्तन निदेशालय की टीम में हिरासत मे ले लिया है। वानी इससे पहले भी इसी प्रकार के मामले में गिरफ्तार हो चुका है तथा वर्तमान में जमानत पर चल रहा था। उसके पास से 60 लाख रुपये बरामद हुए जो हवाला के जरिये पाकिस्तान से आये थे। असलम के अनुसार वह शब्बीर शाह व जैश -ए-मुहम्मद के लिए काम करता है। गिलानी के रिश्तेदारों से भी पूछताछ की जा रही है। गिलानी के दामाद को तहरीक-ए-हुर्रियत को वितिय मदद पहुंचाने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है। इसके लिए कश्मीर  में 14 तथा दिल्ली में 3 स्थानों पर छापेमारी की गई थी।

कैसे होती है टेरर फंडिग

National Investigation Agency
National Investigation Agency
 जांच एंजेसियों के अनुसार सबसे पहले पैसा पाकिस्तान से सऊदी अरब और उसके बाद बांगलादेष व श्रीलंका के हवाला आपरेटरों के जरिये दिल्ली के हवाला आपरेटरों के पास पहुंचता है। उसके बाद दिल्ली व हरियाणा के कुछ व्यापारियों की मदद से यह कश्मीर  के अलगाववादियों तक पहुंचता है। एन.आई.ए. के सामने अलगाववादी नेताओं ने जांच के दौरान यह स्वीकार किया है कि हुर्रियत के सयैद अलीषाह गिलानी को पाकिस्तान से नियमित रूप में पैसा मिलता है। यह पैसा हवाला और सीमा पार व्यापार के जरिये आता है। 

कैसे हुआ मामले का खुलासा और किनके ठिकानो पर हुई रेड

यह सारा मामला तब शुरू हुआ जब हुर्रियत के एक नेता नर्रम खान को एक टी.वी. चैनल पर दिखाये गये ‘स्टिंग’ में यह स्वीकार करते दिखाया गया था कि उन्हें हवाला के माध्यम से पाकिस्तान और वहाँ के आतंकवादी संगठनों से धन मिलता है। नईम खान ने यह भी स्वीकार किया कि बुरहान वानी के मारे जाने के बाद घाटी में षिक्षण-संस्थानों को आग लगाने के दिषा-निर्देष पाकिस्तान से मिले थे। एन.आई.ए. के वकील का कहना है कि उनके पास इस प्रकार की जानकारी है कि जमात-उल-दावा प्रमुख हाफिज सईद और अलगाववादी जिनमें हुर्रियत भी शामिल है, हिज्बुल मुजाहिदीन, लष्कर-ए-तयैबा, दुख्तराने-मिल्लत  जैसे संगठनों के साथ मिलकर देश -विदेश  से हवाला के माध्यम से धन जुटा रहे है तथा कश्मीर  घाटी को अषांत करने के लिए वित-पोषण किया जा रहा है। जांच में जिनके ठिकानों पर छापे मारे गये उनमें अलताफ फंटूस, कारोबारी जहूर वताली, अवामी एक्सन-पार्टी के नेता शहिद-उल-इस्लाम, तहरीक-ए-हुर्रियत के फारूख अहमद डार उर्फ बिटा कराटे, जावेद अहमद  बाबा उर्फ गाजी बाबा को भी पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। इन सभी से आतंकवाद के वित पोषण और घाटी में पत्थर बाजी की घटनाओं के बारे मे पूछताछ की जायेगी।

आतंकवादी देश घोषित होने से बचने के लिए पाकिस्तान की कोशिश 

 आतंकवाद का हमेशा  से पोषक रहा पाकिस्तान अब चेहरा छिपाने की कोशिश कर रहा है। आतंकवाद को समर्थन देने वाले देषों की सूची में नाम आने से बचाने के लिए उसने 5000 संदिग्ध आतंकवादियों के बैंक खाते सील कर दिये है। जिनमें तीन लाख डालर की राषि जमा है। लेकिन पाकिस्तान पर खतरा अभी टला नहीं है। आतंकी फांड़िग पर नज़र रखने वाली संस्था ”दि फाइनेंसियल एक्सन टास्क फोर्स“ (FATF) ने पिछले दिनों पाक को नोटिस देकर तीन महीने का वक्त दिया है। जिससे वह साबित कर सके कि उसने आंतकी संगठनों को मदद पहुंचाने वालों को रोकने के लिए क्या कदम उठाये है। आतंकवाद के वित पोषण संबंधी अतंराष्ट्रीय कानून को 2015 में 187 देशों ने अनुमोदित कर दिया था। पिछले कई वर्षो से पाकिस्तान पर भारत और अफगानिस्तान की सरकारें यह आरोप लगती रही है कि इन देशों  में व्याप्त आतंकवाद को पाकिस्तान वित्तिय मदद कर रहा है। वह आई.एस.आई. की मदद और जमात-उल-दावा सरगना हाफिज सईद के माध्यम से जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का वित-पोषक बना हुआ है। एन.आई.ए. व पर्वतन निदेशालय को टेरर फांडिग की कड़ाई से जांच करके हुर्रियत और पाकिस्तान के चेहरे से नकाब हटाने की कोशिश  करनी चाहिए। अंतराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिबंधो से बचने के लिए हाफिज सईद की यात्राओं पर रोक लगाकर उसे उसके ही घर पर नज़र बंद किया गया है। पाकिस्तानी आवाम में आतंकी संगठनों को मिलने वाली सहानुभूति से आतंक का वित-पोषण रोकना आसान नहीं है। पाकिस्तान एफ.ए.टी.एफ. की स्पेन में होने वाली बैठक में काली सूची में नाम आने से बचने की कोशिश करेगा अन्यथा उसे किसी भी देश  से कर्ज मिलना मुश्किल हो जायेगा।

आगे के लिए सबक

पूर्व की सरकारों द्वारा हुर्रियत को तवज्जो दिया जाना अब एक भूल लगने लगा है क्योंकि हाल ही मे जांच एंजेसियों की जांच में यह साफ हो चुका है कि यह वही असली चेहरा है जो मीडिया के चमचमाते कैमरों के सामने रहता है जिसने कश्मीरी  अवाम को अपनी राजनीति के लिए खूनी खेल में मोहरा बना दिया है। उन्हें शिक्षा व अन्य मूलभूत सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है। वह भी पाकिस्तान के इषारे घाटी से पलायन को मजबूर कर दिया तथा उनकी संपतियों पर कब्जा कर लिया। जब भी कश्मीरी  पंड़ितों की वापिसी या उनकी अलग कालोनियों की बात होती है तो हुर्रियत उसका सबसे ज्यादा विरोध करती है जो उसके स्वार्थ को दर्षाता है। अब यह साफ हो चुका है कि घाटी में आतंकी तंजीमे हुर्रियत की सरपरस्ती में चल रही है। आतंक की असली जड़ हुर्रियत ही है। भारतीय समाज में एक पुरानी कहावत है कि बीमारी का इलाज जड़ से होना चाहिए।





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