ई–कॉमर्स की नई पालिसी


Walmart-Flipkart deal opposed by SJM Karnal


ई–कॉमर्स बाज़ार की वर्तमान स्थिति ?


भारत सरकार के ओधोगिक नीति व संवर्धन विभाग ने प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI ) नीति में ई–कॉमर्स सम्बंधित कुछ महतवपूर्ण बदलाव किये है जिससे भारत में ई–कॉमर्स बाज़ार का परिदृश्य बदलने वाला है | भारत का बाजार एक विशाल उपभोक्ता बाज़ार बन चुका है जिसमे 47 करोड़ इन्टरनेट प्रयोगकर्ता है जो कि जाहिर तौर पर एक बड़ा बाज़ार है | वर्तमान में यह विश्व के किसी भी ई–कॉमर्स बाज़ार से तेज वृद्धि कर रहा है | एक अध्ययन के अनुसार वर्ष 2022 तक यह 150 बिलियन अमेरिकी डॉलर तथा वर्ष 2026 तक 200 मिलियन अमेरिकी डॉलर का हो जायेगा | भारत में अभी तक ई–कॉमर्स में 75 प्रतिशत कैश ओन डिलीवरी होता है| वर्तमान में भारत में अमेज़न तथा फ्लिप्कार्ट जैसी कपनियों का ई–कॉमर्स में दबदबा है | फ्लिपकार्ट का अमेरिकी कंपनी वालमार्ट ने पिछले वर्ष 16 अरब अमेरिकी डॉलर में अधिग्रहण किया था | ये दोनों कंपनियां कैशबैक, डिस्काउंट, एक्सक्लूसिव सेल, फ्लिप्कार्ट प्लस, अमेज़न प्राइम आदि के माध्यम से गला काट प्रतियोगिता में शामिल थी | इस कारण ई–कॉमर्स में छोटी ई–कॉमर्स कंपनियों के वजूद पर प्रशनचिन्ह लग गया था |

ई–कॉमर्स की नई पालिसी
ई–कॉमर्स की नई पालिसी

ई–कॉमर्स की नई पालिसी में क्या प्रावधान है ?


भारत सरकार की नई ई–कॉमर्स पालिसी के माध्यम से भारतीय ई–कॉमर्स बाज़ार को सभी के लिए निष्पक्ष तथा समान बनाने का प्रयास कर रही है | जिसके लिए कुछ नए नियम बनाये गए है :-

·        ई–कॉमर्स की नई पालिसी में सभी कंपनियों पर अपने ग्राहकों को कॅश डिस्काउंट तथा अन्य किसी प्रकार की छुट को वर्जित किया गया है |
·        कोई भी प्लेटफ़ॉर्म (ई–कॉमर्स कंपनी) अपना या अपनी ऐसी किसी कंपनी का कोई सामान अपने प्लेटफ़ॉर्म से नहीं बेचेगी जिसमे उसकी हिस्सेदारी या निवेश हो |
·        कोई भी कंपनी अपनी इन्वेन्ट्री का 25 प्रतिशत से ज्यादा किसी प्लेटफ़ॉर्म से नहीं बेच सकती |
·        कोई भी प्लेटफ़ॉर्म अपने ग्राहकों अथवा किसी बड़े वेंडर को कोई ख़ास रियायत नहीं दे सकता |
·        यह पालिसी 01 फ़रवरी 2019 से लागू होगी |
·        सभी ई -कॉमर्स कंपनियों को हर वर्ष सितम्बर में रिज़र्व बैंक में एक रिपोर्ट अपने ऑडिटर के माध्यम से देनी होगी कि वह कंपनी नई ई -कॉमर्स पालिसी की शर्तों का पालन कर रही है|
·        कोई भी प्लेटफ़ॉर्म किसी भी बैंक या अन्य किसी पेमेंट कंपनी से कोई विशेष करार नहीं कर सकता |
·        MSME सेक्टर को भी ई -कॉमर्स पालिसी का लाभ मिल सकता है अगर वे अपनी गुणवत्ता और आधुनिक तकनीक का सहारा ले|
ई–कॉमर्स की ग्रोथ
ई–कॉमर्स की ग्रोथ 

नई ई -कॉमर्स पालिसी के प्रति बाज़ार का नजरिया 


अखिल भारतीय व्यापारी संघ ने इस  नई ई -कॉमर्स पालिसी का स्वागत किया है| अभी तक कुछ बड़ी ई -कॉमर्स कंपनियां भारतीय खुदरा बाज़ार पर अपना कब्ज़ा करना चाह रही थी| इसके लिए वे शुरुआत में खुद घाटा उठाकर भी “कैश बर्न डिस्काउंट” से ज्यादा से ज्यादा ग्राहकों तक अपनी पहुँच बनाने की प्रतियोगिता में शामिल थी| लेकिन अब ई -कॉमर्स बाज़ार से किसी एक या दो बड़ी कंपनियों की मोनोपोली ख़त्म होगी तथा स्वदेशी छोटी कंपनियों को भी अपना व्यापार बढाने में मदद मिलेगी| स्वदेशी जागरण मंच ने भी वालमार्ट द्वारा फ्लिप्कार्ट अधिग्रहण का देश भर में विरोध किया था|

सरकार ने ई -कॉमर्स पालिसी लागू करने के लिए 01 फ़रवरी 2019 की तिथि निर्धारित की है लेकिन अमेजान और फ्लिप्कार्ट इसे दो महीनों के लिए बढ़ाने की गुहार सरकार को कर चुके है | लेकिन Paytm, ebay, शॉप101, शॉपक्लू जैसी छोटी कंपनियां इसे तय समय सीमा में लागू करवाना चाहते है | एक अंदेशा यह भी जाहिर किया जा रहा है कि इस कदम से निवेश पर विपरीत असर तो नहीं पड़ेगा ? लेकिन यह डर बेबुनियाद है क्योंकि इतने विशाल बाज़ार को कोई भी कंपनी अनदेखा नहीं कर सकती | 

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