अगर कवि हो तुम









चेतावनी


अगर कवि हो तुम
सम्भालों शब्दों, भावनावों को
झंडें उठायोगे तो
शब्द छुट जायेंगे रास्ते में
भावना कुचली जा सकती है


झंडा केचुली सा
ढक लेगा पुरा व्यक्तित्व


शब्द अपने, पराये लगेगें
जब घायल इंसानियत मांगेगी इन्साफ
झंडे एक दुसरे की ओर तकेगे


शब्दों – भावनाओं की पैरवी करो
झण्डों से ही इनको खतरा
खुद बचो, इन्हें बचाओ
अगर कवि हो तुम |

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